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रोड में हे गड्डे या गड्डे में हे रोड - कवि दिनेश कालमा

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शाजापुर- इन दिनों एबी रोड पर हो राजे जानलेवा गड्डे  से हर कोई परेशान हे जिम्मेदार इस और ध्यान नहीं दे रहे हे जिस पर मक्सी के प्रसिद्ध कवि जो रास्ट्रीय मंच पर नगर का नाम गोरान्वित कर चुके हे ने लिखी कविता-
रोड में हे गड्डे या गड्डे  में हे रोड ।
हम तो चाहे मंजिल अपनी ऐ किस्मत हमको छोड़।।

सड़क बनी थी आला दर्जे।
उबड़ खाबड़ कर गया कोन।।

हिल गये सब पुर्जे पुर्जे।
गिर गया मेरा फ़ोन ।।

दुर्घटना से देर भली।
अब धिरे धिरे दौड़।।

धुँआ धूल सा सारा आलम।
मर आँखे अपनी फोड़।।

रोड में हे गड्डे  या गड्डे में हे रोड
उस सड़क के जोड़ पे।।

गड्डे  भरे उस रोड पे।
इक जीवन ज्योति छोड़ी ।
इस दिल की तडप से 
इस दर्द सड़क से
ऐ राहत मिल जा थोड़ी।।

जरा सँभलना धिरे चलना , मत सर को अपने फोड़----रोड में हे गड्डे  या गड्डे  में हे रोड----।।।

सड़को से पगडंडी अच्छी
पके इरादे राहे कच्ची
मोटर ने हिचकोले खाये
गाड़ी के संग हाय हडियों के जोड़।
रोड में हे गड़े या गड़े में हे रोड।।
                     दिनेश कालमा

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Shahzad Khan

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