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गुरु पूर्णिमा पर हुआ भव्य आयोजन -मालवा संत पं. गोविंदजाने की अनुकरनिय पहल बांटे कंबल, शॉल, अनाज एवं नकद राशि भेंटकर भोजन करवाया


मालवा अभीतक- एक समय था जब जिस व्यक्ति को दो वक्त की रोटी के लिए फटे कपड़े पहनकर दर-दर की खाक छानना पड़ रही थी। ऐसे में तंगहाल जीवन गरीबी व भूख की तड़प से भली-भांति रूबरू भी हो चुका था। ऐसे हालात में उस व्यक्ति पर परमात्मा की कृपा हुई और आज वही शख्स गरीबों का दु:ख-दर्द बांटकर उनके आंसू पोंछने के लिए माह की हर पूर्णिमा पर सवा लाख रुपए खुशी-खुशी खर्च कर रहा है। 

ये शख्स हैं ईश्वर की कृपा के पात्र व गरीबों के हमदर्द मालवा संत पं. विनोद नागर गोविंदजाने। गरीब एवं वृद्ध महिला पुरुषों को भोजन कराकर नए वस्त्र देकर उनके आंसू पोंछने का यह नजारा महीने की हर पूर्णिमा पर गोविंदजाने आश्रम दास्ताखेड़ी में देखा जा सकता है। आश्रम आने वाले हजारों गरीबों का पहले स्वागत सत्कार किया जाता है, तिलक लगाकर उन्हें वस्त्र, अनाज व नकद राशि दी जाती है। इसके बाद सभी दरिद्रनारायणों को सम्मान के साथ भोजन कराकर विदा किया जाता है। सोमवार को भी आश्रम आए करीब तीन हजार गरीब बुजुर्ग माता-पिता एवं बच्चों को समिति ने ठंड से बचने के लिए सवा लाख रुपए के कंबल, शॉल, अनाज एवं नकद राशि भेंटकर भोजन करवाया। संतश्री नागर का कहना है कि उनके लिए गरीब वृद्ध, बुजुर्ग महिला-पुरुष नारायण से कम नहीं, जिनकी वे मां-बाप समझकर सेवा करते हैं। 

मजदूरी के साथ-साथ करते थे कुष्ठ रोगियों की सेवा- मालवा संत पं. गोविंदजाने वर्ष 1998 में गरीबी से तंग आकर 18 वर्ष की उम्र में रोजी-रोटी की तलाश में देवास चले गए थे। यहां उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष मजदूरी कर अपना भरण पोषण किया साथ ही कुष्ठ रोगियों की सेवा भी की। इसी दौरान वे वहीं पर एक बुजुर्ग महात्मा के सान्निध्य में आए। उनकी तकदीर बदली और वर्ष 2000 में मां सरस्वती की कृपा से उन्होंने कथा करना शुरू कर दिया। साथ ही गरीबों की सेवा करने का भी संकल्प ले लिया। वर्ष 2004 में आश्रम परिसर में पांच मंजिला पातालेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण का भूमिपूजन कर कार्य शुरू कर दिया। वर्तमान में पांच मंजिला मंदिर जिसमें हर मंजिल पर देवी-देवता विराजमान है। 
अब तक एक हजार गरीब बेटियों का कर चुके कन्यादान-गरीबी के दौर में रहकर जब उन्हें पता चला कि गरीब मां-बाप के लिए बच्चों को पालना व गरीबी में बेटी की शादी करना कितनी कठिन चुनौती होती है। उसी दौरान गरीबी की इस पीड़ा से त्रस्त होकर संतश्री नागर ने अपने जीवन में 11 हजार बेटियों का ब्याह रचाने का संकल्प भी ले लिया। पं. नागर अब तक करीब एक हजार गरीब बेटियों का कन्यादान कर चुके हैं। 
 
shahzad Khan

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