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होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन का 70 वा स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया -कलेक्टर श्रीमती श्रीवास्तव ने परेड की सलामी ली

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शाजापुर /होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन का 70 वा स्थापना दिवस शाजापुर के होमगार्ड मैदान में उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कलेक्टर श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने परेड की सलामी ली।
मुख्य अतिथि कलेक्टर श्रीमती श्रीवास्तव के आगमन के साथ ही परेड ने आकर्षक मार्च पास्ट करते हुए सलामी दी। इसके उपरांत डायरेक्टर जनरल होमगार्ड मध्यप्रदेश श्री व्ही.के. सिंह के संदेश का वाचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। इस मौके पर कमाण्डेट श्री विक्रम मालवीय ने होमगार्ड संगठन के गौरव पूर्ण इतिहास के बारे में विस्तार से बताया। अंत में उपस्थित अतिथियों के प्रति कमाण्डेंट श्री मालवीय ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्रीमती मीनाक्षी सिंह, एसडीएम श्री राजेश यादव, आरटीओ श्री ज्ञानेन्द्र वैश्य, एफएसएल अधिकारी श्री आर.सी. भाटी, तहसीलदार श्री अनिरूद्ध मिश्रा, यातायात प्रभारी श्री पी.के. व्यास सहित मीडिया प्रतिनिधि और आम नागरिक उपस्थित थे।
होमगार्ड के जवान विषम परिस्थितियों में भी मुस्तैदी के साथ कार्य करते है-
होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन के जवान अल्प सुविधा होने के बावजूद अपने कर्तव्यों के निष्पादन में कमी नही आने देते। चुनाव हो या नगर सुरक्षा आदि के मामलों में होमगार्ड जवान पुलिस बल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते है। बाढ़, भूकंप या कोई प्राकृतिक प्रकोप जैसी आपदाओं के समय विषम परिस्थितियों में होमगार्ड के जवान मुस्तैदी के साथ कार्य करते है। यह बात कलेक्टर श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने होमगार्ड स्थापना दिवस पर आज आयोजित हुए समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
होमगार्ड का संगठन का गौरवपूर्ण इतिहास-
मध्यप्रदेश का होमगार्ड संगठन आज पूरे राष्ट्र में सर्वोत्तम है। स्वतंत्रता के बाद इस संगठन की स्थापना वर्ष 1947 में तत्कालीन सी.पी.एण्ड बरार होमगार्ड एक्ट रूल्स के तहत की गई थी। तत्पश्चात होमगार्ड के ढांचे की स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन ने 24 अगस्त 1976 को दी।
संगठन का स्वरूप स्वयंसेवी संगठन के रूप में किया गया है। कानून व्यवस्था का मामला हो, आग या बाढ़ से बचाव का कार्य हो, प्राकृतिक प्रकोप हो, चुनाव ड्यूटी हो, ग्राम सुधार कार्य हो, पल्स पोलियो संबंधी कोई कार्य हो, वृक्षारोपण संबंधी कार्य हो या नागरिक सुरक्षा संबंधी कार्य हो इस संगठन ने उसमें सहयोग देकर समय-समय पर अपने जौहर दिखाए है।
वर्ष 1947 में स्थापना के तुरंत बाद  संगठन ने हैदराबाद एक्शन में भाग लेकर हैदराबाद के रजाकारों के उपद्रवों को शांत करने तथा निजाम हैदराबाद को स्वतंत्र भारत में शामिल कराने संबंधी कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1950 तथा 1974 में हुई रेल हड़ताल के दौरान संगठन द्वारा रेल संपत्ति, रेल लाई, पुलों की सुरक्षा तथा रेल यातायात को सुचारू रूप से चलाने हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। 1965 में भारत-पाक युद्ध के समय भी संगठन द्वारा संवेदनशील, महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सेवाएं दी गई। भारत शासन द्वारा वर्ष 1971 में बांग्लादेश युद्ध के समय इस संगठन की तीन बटालियनों को सहायक सीमा सुरक्षा बल बनाकर मोर्चे पर भेजा गया, जहां अधिकारी व जवानों द्वारा बीएसएफ के साथ कंधे से कंधा मिलकार महत्वपूण्र संस्थानों की सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने मंे उल्लेखनीय योगदान दिया गया।
वर्ष 1985 में पंजाब में 1500 होमगार्ड, वर्ष 1989 में तमिलनाडु में 2500 होमगार्ड एवं उत्तरांचल चुनाव में 1000 होमगार्ड सैनिको ने जाकर इन राज्यों में चुनाव जैसी महत्वूपर्ण ड्यूटी संपादित की, जिसकी इन राज्यों के अधिकारियों एवं जिला प्रशासन ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
वर्ष 1978 में जेल कर्मचारियों की पूरी हड़ताल के समय शासन के निर्देशानुसार संगठन के अधिकारी एवं जवानों द्वारा जेलो का चार्ज लेकर वहां का कार्य व्यवस्थित ढंग से संपादित किया गया। वर्ष 1998 में डाक तार विभाग की हड़ताल के समय राज्य के कई जिलो में संगठन द्वारा डाक छटाई एवं डाक वितरण का कार्य पूर्ण लगन तथा निष्ठा के साथ किया गया। वर्ष 1998 में 16000 होमगार्ड द्वारा विधानसभा चुनाव का कार्य व उसके बाद लोकसभा चुनाव का कार्य पूर्ण निष्ठा के साथ संपन्न कराये गये। ,
वर्ष 1984 में भोपाल गैस त्रासदी के समय अपनी जान की परवाह न कर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जहां तैनात किया गया, अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या की घटनाओं को लेकर फैली साम्प्रदायिक दंगो के समय भी इस संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस संगठन के 600 जवान मध्यप्रदेश के नक्सली प्रभावी जिलों में सशक्त रूप से जनजागरण अभियान के तौर पर कार्य कर रहे हैं। इस अभियान के दौरान दो होमगार्ड सैनिको ने अपने प्राणो की बली भी दी। प्रत्येक के परिवार को राज्य शासन दो लाख रूपये की राशि अनुदान के रूप में प्रदान की गई। ,
उड़ीसा में आए तुफान के समय संगठन के 1000 सैनिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान माल की रक्षा की एंव सड़ी गली लाशो को मलबे से निकालने का अति महत्वपूर्ण कार्य किया। गुजरात में आए भूकम्प के समय भी इस संगठन के अधिकारी एवं 1000 जवानों ने वहां जाकर बचाव कार्य किया।
नवम्बर 1948 में भारत के गर्वनर जनरल लार्ड लुई माउण्टबेटन ने इस संगठन की परेड देखी व कहा- ‘‘ मैंने युनाईटेड किंगडम की व अन्य कई यूनिटों की परेड देखी, परंतु यह कहने में मुझे काई हिचक नहीं है कि मैंने ऐसी चुस्त परेड पहले कभी नहीं देखी।’’ जुलाई 1949 में होमगार्ड की एक परेड भारत के प्रथम सेनापति जनरल के.ए. करिअप्पा ने कहा- ‘‘ऐसी उत्साही, उत्सुक एवं अनुशासित टुकड़ी मैने पूर्व कभी नहीं देखी।’’
उड़ीसा के तुफान एवं गुजरात में आए भूकम्प से हुई विनाशलीला में इस संगठन के अधिकारी एवं जवानों द्वारा सुरक्षा से लेकर राहत पहुंचाने तक मध्यप्रदेश होमगार्ड ने अपनी जिस उत्सर्ग भावना तथा अप्रतिम कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। उसकी सर्वत्र भूरी-भूरी प्रशंसा हुई है और इसका श्रेय राज्य शासन के कर्णधारों के शुभाशिष होमगार्डस के अधिकारियों के प्रबुद्ध मार्गदर्शन तथा स्वंय सेवी कर्मचारियों की अदम्य कर्तव्यनिष्ठा को दिया जा सकता है।
वर्तमान में कानून व्यवस्था, वायरलेस ड्यूटी, ट्राफिक नियंत्रण, भू-राजस्व संग्रहण, विक्रय कर, आबकारी वसूली, विद्युत मण्डल ड्यूटी, नारकोटिक्स ड्यूटी, अति महत्वपूर्ण व्यक्त्यिों, न्यायाधिशो की सुरक्षागार्ड ड्यूटियों मंे भी होमगार्ड्स बल का नियोजन किया गया है।
नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से होमगार्ड ने गौरवशाली इतिहास का सृजन किया है एवं अतुलनीय परम्परा एवं निःस्वार्थ सेवा के उदाहरण प्रस्तुत किए। भूकम्प, अग्निशमन, गैस त्रासदी, इंदिरा सागर बांध से डूब पीडि़तो को पुर्नस्थापना या अन्य कोई प्राकृतिक आपदा या उज्जैन में गत सिंहस्थ में क्षिप्रा के समस्त घाटों पर एवं नावों में बचाव कार्य हेतु होमगाडर््स बल नियोजित किया गया था। जिसकी सफलतम उपलब्धि यह रही की एक भी केजुअल्टी नहीं हो सकी। निःस्वार्थ एवं समर्पित सेवाओं के ऐसे उदाहरण सुविधा से परे हटकर दूर तक देखना या खोजना कठिन प्रतिक होता है।
इस संगठन के जवानों का मात्र 34 कार्य दिवस का प्रशिक्षण देकर इस स्तर का बना दिया जाता है कि वे हर क्षेत्र में रेग्युलर युनिटो के जवानों से किसी भी स्तर पर पीछे न रहे।
इस प्रकार होमगार्ड्स का प्रदर्शन सदैव न केवल जिला प्रशासन एवं पुलिस केा अपेक्षा के अनुरूप रहा है बल्कि इससे विभाग का नाम, यश, छवि और उज्जवल हुई है। यह इनके मुख्य रूप से उनके स्तर से निःस्वार्थ, अनुशासन बद्ध, सर्मित, साहसिक, सहनशीलता एवं कार्य के प्रति लगनशीलता है। कहीं कभी कोई ऐसा उदाहरण नहीं है जहां होमगार्ड्स बल कर्तव्य निष्पादन में पीछे रह गया है या जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को इस बल के कारण नीचा देखना पड़ा हो। आज यह बात प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में अपेक्षित है। शासन द्वारा दी गई अल्प सुविधाओं के बावजूद इस संगठन के जवानों द्वारा नागरिक सुरक्षा के क्षेत्र में सदैव सराहनीय योगदान रहा है।
यह संगठन जिला उज्जैन में सन् 1962 से अपनी उत्कृष्ट एवं निःस्वार्थ सेवाएं देकर लगातार कर्तव्यरत है।

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Shahzad Khan

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