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नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की... संगीतमय भागवत कथा में धूमधाम से मनाया श्री कृष्ण जन्मोत्सव

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शाजापुर। शुक्रवार का दिन शहरवासियों के लिए यादगार बन गया और इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बालरुप के दर्शन पाकर भक्त धन्य हो गए। जैसे ही नंदबाबा भगवान श्री कृष्ण को लेकर कथा पांडाल में पहुंचे पूरा पांडाल गोकुल बन गया और गोपियों व ग्वालों ने भगवान श्री कृष्ण के जयकारे लगाकर श्री कृष्ण के चरण शिरोधार्य कर उनका आशीर्वाद लिया। ये नजारा था भावसार मोहल्ला स्थित मां हिंगलाज माता मंदिर परिसर का, जहां संगीतमय भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। 
इसके पूर्व कथा का वाचन करते हुए कथावाचक पं. देवकरण शर्मा ने कहा कि हम लोग छोटे बच्चों को संस्कारवान बनाने में ज्यादा जोर देते हैं और उसकी शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन अपनी संतान को संस्कारवान बनाने वाले माता-पिता का भी संस्कारवान होना अति आवश्यक है, क्योंकि जो संस्कार माता-पिता में होंगे वही संस्कार उनका पुत्र भी ग्रहण करेगा। उन्होंने कहा कि पहले के समय में शिक्षक यदि किसी विद्यार्थी की पिटाई किया करते थे तो माता-पिता का कोई दखल नहीं होता था, लेकिन आज यदि किसी बच्चे को किसी शिक्षक ने हाथ भी लगा दिया तो उसके परिजन शिकायत लेकर पहुंच जाते हैं, जबकि माता-पिता भी जानते हैं कि शिक्षक उनकी संतान को शिक्षित कर उसके जीवन की राह आसान कर रहा है। लेकिन इसके बाद भी शिक्षक के साथ आज जो व्यवहार किया जा रहा है वह सही नहीं है और यह सब हमारे संस्कारों पर निर्भर करता है। यदि माता-पिता संस्कारवान हों तो वे अपनी संतान को भी संस्कारवान बनेगी और अपने माता-पिता के साथ अपने कुल का भी नाम रोशन करेगी। इसलिए जिस प्रकार एक घड़े को कुम्हार ठोक-पिटकर लोगों के उपयोग के लिए तैयार करता है। ठीक उसी प्रकार शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों को संस्कारित और शिक्षित बनाने और उसके जीवन को सही दिशा देने के लिए ही उसकी पिटाई करता है। इसमें माता-पिता का दखल नहीं बल्कि उनकी सहानूभुति शिक्षक के साथ होना चाहिए।
खूब उड़ा माखन-मिश्री...
कथा के बाद जेैसे ही भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आया पूरा वातावरण कृष्ण मय हो गया और जैसे ही नंद बाबा और माता यशोदा बने श्रद्धालू ढोल की थाप पर बालरुपी कृष्ण को लेकर कथा पांडाल पहुंचे हर कोई श्री कृष्ण के दर्शन और आशीर्वाद के लिए लालायित हो गया। यही नहीं भक्तों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भगवान श्री कृष्ण की एक झलक पाने के लिए लोगों ने कतार तक तोड़ दी ओर जैसे ही कृष्ण के दर्शन उन्हें हुए भक्तों ने उनके चरण शिरोधार्य कर अपना जीवन धन्य किया। कथावाचक पं. शर्मा ने भी बालरुपी कृष्ण का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि हमें भी ऐसा सौभाग्य कम ही मिलता है जब खुद श्री कृष्ण हमें अपने साथ लाड़ लड़ाने का अवसर प्रदान करें। 

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Shahzad Khan

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