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योग्यता को दरकिनार कर भारत विश्व में अग्रणी नहीं हो सकता,सपाक्स द्वारा न्याय दिवस आयोजित

शाजापुर। योग्यता को दरकिनार कर भारत विश्व में अग्रणी नहीं हो सकता। देश से प्रतिभा का पलायन हो और औसत योग्य व्यक्ति राष्ट्र निर्माण कर सकें, यह संभव नहीं है। ऐसे में 'मेक इन इंडिया' के लिए हमें बाहरी तकनीकों पर ही निर्भर होना होगा। पदोन्नति का स्थापित आधार वरिष्ठता व योग्यता होती है, पदोन्नति में आरक्षण से योग्यता अतिक्रमित होती है।

यह बात डाॅ हेमंत दुबे ने स्थानीय नईसड़क स्थित होटल महाराजा में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) द्वारा न्याय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। सपाक्स द्वारा यह कार्यक्रम 30 अप्रैल 2016 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा मध्यप्रदेश पदोन्नति नियम 2002 को असंवैधानिक ठहराते हुए अपास्त किए जाने के एक वर्ष पूर्ण होने पर न्याय दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डाॅ दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन ने पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने संबंधी माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान न करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में निर्णय के विरूद्ध अपील दायर कर दिए जाने से सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवा में कार्यरत प्रदेष के 70 प्रतिशत अधिकारी कर्मचारी अन्याय का शिकार होकर बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

नवीन महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ वीके शर्मा ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था की विसंगति से लगभग सभी विभागों के वरिष्ठ पदों पर निर्धारित आरक्षण सीमा 36 प्रतिशत से अधिक एवं कहीं-कहीं 100 प्रतिशत तक अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के शासकीय सेवक पदस्थ हो गए हैं। प्रदेश् के मुखिया द्वारा बहुसंख्यक वर्ग के साथ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जा रही है, जबकि शासन का प्रथम कर्तव्य होता है कि वह बिना भेदभाव के सभी वर्गाें के हितों का ध्यान रखे। हाईस्कूल मेवासा के प्राचार्य प्रवीणकुमार मंडलोई ने कहा कि आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था विगत 70 वर्षाें से जारी है एवं आज भी वास्तविक हकदार आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने का निर्णय माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को आधार मानकर ही दिया गया है, सपाक्स पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करवाने की कानूनी लड़ाई जीतकर ही रहेगा। सपाक्स समाज के प्रतिनिधि जीतसिंह गंभीर ने कहा कि वोट की राजनीति ने प्रदेश ही नहीं देश के आर्थिक व सामाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न कर दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ’माई के लालों’ जैसे जुमले बोलकर बहुसंख्यक वर्ग के आत्मसम्मान को ललकारा है। कार्यक्रम को श्रीमती श्यामा सक्सेना व मोहित व्यास ने भी संबोधित किया। सपाक्स नोडल आॅफिसर जाॅय शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए सपाक्स की आगामी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन आनंद नागर ने किया तथा आभार केके अवस्थी ने माना।

संविधान की पूजा अर्चना कर हुआ कार्यक्रम प्रारंभ

सपाक्स द्वारा आयोजित न्याय दिवस के इस कार्यक्रम का शुभारंभ वक्ताओं तथा सपाक्स साथियों द्वारा ’भारत का संविधान’ की पूजा अर्चना कर किया गया।

Shahzad Khan

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