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ठाकुरजी के भरोसे चल रहा तीनों लोकों का काम-पं.शर्मा भागवत कथा में हुआ छप्पन भोग तथा गोवर्धन पूजा का आयोजन

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शाजापुर (नि.प्र.)। ठाकुरजी ने अपने बालक रूप में ही कई लीलाओं के साथ दुष्टों का नाश कर धरती को पाप के भार से मुक्त करना शुरू कर दिया था। देवराज इन्द्र के अभिमान का मर्दन करने वाले लीलाधर गोपाल ने गिरिराज पर्वत को अपनी एक उंगली पर धारण करके संसार को यह बता दिया कि त्रिलोक के भार को भी उन्होने ही संभाला हुआ है। गिरीराजधरण की कृपा से ही संसार चल रहा है, प्रभु की इच्छा के बिना तीनों लोकों में कुछ नहीं हो सकता। इसलिए सांसारिक मनुष्य को भी यह चाहिए कि वह ठाकुरजी के भरोसे अपना जीवन अर्पित कर दे वही उसे समस्त भारों से मुक्त करेंगे।
उक्त आशीर्वचन नर्मदा के तट संदलपुर (छोटा काशी) से आए पं.नटवरलाल शर्मा ने स्टेशन मार्ग स्थित नहर की पुलिया के समीप आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के पांचवे दिवस मंगलवार को ठाकुरजी के छप्पन भोग तथा गोवर्धन पूजा संबंधित कथा प्रसंगों का वर्णन करते हुए आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुजनों को प्रदान किए। इस अवसर पर श्री शर्मा ने यह भी कहा कि वृन्दावन की गलियों में गायें चराते हुए जब कन्हैया की बांसुरी बजा करती तो समय रथ का पहिया भी थम जाया करता था। प्रभु का बाल रूप जितना अलौकिक और मनमोहक बनकर वृन्दावनवासियों को रिंझाता, उनकी नटखट लीलाएं गोपियों का उतना ही मनोरंजन भी करती। इस मौके पर आयोजन समिति द्वारा गोवर्धन पर्वत बनाकर गोवर्धन पूजा की गई तथा अन्नकूट का आयोजन करके ठाकुरजी को छप्पन भोग भी लगाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु महिला एवं पुरूषों ने झूमते-नाचते हुए भागवत कथा का श्रवण किया। कथा के अंत में वार्ड क्रमांक 29 के पार्षद प्रतिनिधि दिनेशचन्द्र सौराष्ट्रीय ने कथावाचक पं.शर्मा का पुष्पमाला व साफा पहनाकर तथा अंगवस्त्र भेंटकर वार्डवासियों की तरफ से आत्मिय अभिनन्दन भी किया।
श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह प्रसंग आज
कथावाचक श्री शर्मा द्वारा संगीतमय भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिवस आज बुधवार को कथा स्थल पर श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह प्रसंग का सविस्तार वर्णन किया जाएगा। इस मौके पर विभिन्न पात्रों द्वारा विवाह प्रसंग का सजीव चित्रण भी किया जाएगा। इसके उपरान्त कल गुरूवार को कथा के अंतिम दिवस सुदामा चरीत्र का वर्णन करने के साथ कथा का भक्तिभाव के साथ समापन होगा।

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Shahzad Khan

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