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बुझ जाए हवा में कौन नमन करता उनको, सूरज को सम्मान मिला है जलते रहने का- पूर्व कलेक्टर राजीव शर्मा ने सपाक्स के जिला सम्मेलन में कहा

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जरुरत मंदों को उनका हक दिलाने का यज्ञ है सपाक्स

शहज़ाद खान-शाजापुर। विश्व बंधुत्व की भावना के बिना संगठनात्मक ताकत अधूरी है। हमारा देश लम्बे समय तक गुलामों की जंजीरों में इस कारण जकड़ा रहा क्योंकि देशवासियों में संगठनात्मक शक्ति का अभाव था। धर्म, जाति, ऊंच-नीच की भावना और साम्प्रदायिक सद्भाव को नष्ट कर हमें सदियों तक गुलाम बनाकर रखा गया लेकिन अब समय आ गया है हम अपनी संगठनात्मक शक्ति का परिचय देते हुए देश में एकता, भाईचारा और सदभाव की भावना कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दें। हमारा आदर्श सूरज होना चाहिए ‘‘बुझ जाए हवा में कौन नमन करता उनको, सूरज को सम्मान मिला है जलते रहने का‘‘। यदि सपाक्स संगठन भी सूर्य को आदर्श बनाते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधे तो
देश का सर्वांगीण विकास हो सकता है। शासकीय नौकरियों में जातिगत आधार पर आरक्षण के कारण युवा प्रतिभाओं का गला घोटा जा रहा है और पदोन्नति में भी आरक्षण देकर ऐसी व्यवस्था लागू की जा रही है जो समाज के बहुत बड़े वर्ग में निराशा की भावना पैदा कर रही है।
यह बात पूर्व कलेक्टर राजीव शर्मा ने सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) और सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था के तत्वावधान में एबी रोड़ स्थित एक निजी गार्डन में आयोजित जिला सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सपाक्स के प्रांतीय संरक्षक श्री शर्मा ने कहा कि यह समय धर्म, जाति तथा सम्प्रदाय की भावना से ऊपर उठने का है। शासकीय नौकरियों में आरक्षण और फिर
पदौन्नति में भी आरक्षण देकर योग्यता को दर किनार किया जा रहा है, यदि सपाक्स संगठन को मजबूत बनाना है तो समाज के सभी वर्गों को इसमें शामिल करना होगा। देश के संविधान में प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता और प्रगति की गारंटी दी गई है, लेकिन आज इस अधिकार का हनन हो रहा है। उन्होने कहा कि हमें अखंड भारत का सपना देखना चाहिए, यदि समाज समृद्ध होगा तो निश्चित रूप से प्रदेश ही नहीं वरन् देश में भी समृद्धि आएगी।
श्री शर्मा ने जर्मनी के विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस देश में दो टुकड़े कर बीच में लोहे की मजबूत दीवार बना दी गई थी, लेकिन पश्चिम जर्मनी ने वैज्ञानिक प्रगति करते हुए इस दीवार को तोड़ दिया। ठीक इसी तरह सपाक्स संगठन को भी चाहिए कि वर्ग भेद की दीवार को ढहाने का प्रयत्न करे। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि यदि सपाक्स संगठन मजबूत होगा तो आगे चलकर अजाक्स जैसे अनेक संगठन भी इसमें शामिल हो सकते हैं। हम लोगों को बिखेरने और बांटने के लिए नहीं वरन् जोड़ने के लिए निकले हैं। श्री शर्मा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि सपाक्स संगठन मजबूत हुआ तो आगे चलकर हो सकता है कई लोगों को ईर्ष्या होगी और उनके पेट में मरोड़ उठने लगेगा, ऐसे लोग षड़यंत्र के जरिए संगठन को कमजोर करने की कोशिश भी कर सकते हैं, ऐसी स्थिति में हमें चाहिए कि ऐसे षड़यंत्रकारी लोगों से भयभीत नहीं हो। जातिगत आधार पर किसी को भी अपमानित करने का हमें अधिकार नहीं है, सपाक्स संगठन के माध्यम से जाति और धर्म की दीवार को हमें तोड़ना होगा।
उन्होंने जंगल के राजा शेर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह जंगल में चलता है तो छोटे-मोटे परिंदे सहित अन्य जंगली जानवरों में दहशत फैल जाती है और वन प्रांत में भूकम्प जैसा आ जाता है। शेर जैसी यही स्थिति सपाक्स संगठन की होना चाहिए और जब यह पूरी ताकत के साथ खड़ा हो तो वह प्रदेश ही नहीं वरन् देश में भी पहचाना जाए। राजनैतिक दलो को सिर्फ वोट की राजनीति समझ में आती है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने कहा है कि बैर को प्रेम से जीता जाना चाहिए। इसी आदर्श को यदि सपाक्स संगठन भी अपनाए तो आपसी सदभाव और भाईचारे के जरिए हम जिले ही नहीं वरन् प्रदेश के लाखों लोगों को इस संगठन में शामिल कर सकते हैं। उन्होंने भरे हुए कंठ से कहा कि मेरे बारे में कहा जाता है कि मैंने कलेक्टर के रूप में जिले में राज किया, लेकिन यह अतिश्योक्ति है, वरन् शाजापुर जिले की जनता ने मेरे दिल पर राज किया है और यह राज आज भी कायम है।

अंत में उन्होंने अपनी कविता की पंक्ति से बात समाप्त करते हुए कहा कि ‘अपना होश बनाए रखना, अपना जोश बनाए रखना, जब तलक जीत नहीं जाए हम, अपना आक्रोश बनाए रखना।’ इसके पूर्व कार्यक्रम को सपाक्स के संस्थापक अजय कुमार जैन, प्रांतीय सचिव राजीव खरे, सपाक्स पदाधिकारी पीपी सिंह, बीएम सोनी, सपाक्स समाज के प्रदेशाध्यक्ष पीएस परिहार, उज्जैन संभाग समन्वयक अशोक दुबे, जिला नोडल अधिकारी जॉय शर्माए प्रधानाध्यापक गजेंद्रसिंह खींची ने भी सम्बोधित किया। अतिथियों का स्वागत संजय नागर मबावि, पीके मण्डलोई, राजेंद्र रिणवा, अरूण व्यास, श्रीमती बबीता लेओपेट्रिक, जितेंद्रसिंह राजपूत, दिनेश पालीवाल, ललित तिवारी, रघुवीरसिंह पंवार, श्रीमती प्रतिभा शुक्ला, श्रीमती रेखा शर्मा, केके अवस्थी, अजय शर्मा, सुबोध पाठक, डा ललित शर्मा, लोकेंद्र नागर, अजय शर्मा, श्रीमती हेमलता शर्मा, प्रेमनारायण मंडलोई पोलायकला, वैभव तिवारी शुजालपुर, लोकेंद्रसिंह डोडिया शुजालपुर, हर्ष चतुर्वेदी कालापीपल, जगदीश प्रसाद शर्मा कालापीपल, सुभाष शर्मा कालापीपल, मांगीलाल अंबावतिया मो बड़ोदियाए राजेंद्र शर्मा मो बड़ोदिया, प्रदीप कुमार गामी मो बड़ोदिया, दिलीप त्रिवेदी, नितिन श्रीवास्तव, राजदत्त दुबे, शिरीष सुमन शर्मा, त्रिलोकचंद भालोट, चेतन श्रीवास्तव, मनीष जोशी, अजय सिंह चैहान, मनीष त्रिवेदी, जाफर शाह, वीपी चावड़ा, भरत शर्मा आदि ने किया। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज, परषुराम सेना, करणी सेना, मुस्लिम समाज, कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों ने भी अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएस जादौन ने दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रेखा पुरोहित ने किया एवं आभार जिला नोडल ऑफिसर सपाक्स डॉ एनएस सिकरवार ने माना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री शर्मा का गला उस समय भर आया जब हजारों की संख्या मे उपस्थित सैलाब मे से उन्हें एक व्यक्ति ने कहा कि आप शाजापुर वालों के दिल में बसे हो। यह सुन श्री शर्मा की आँखें नम हो गयी और कहा कि वे शाजापुर के नहीं बल्कि शाजापुर उनके दिल में बसता है।

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Shahzad Khan

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