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दुर्घटनाग्रस्त वाहन के मालिक को देना होगा मुआवजा - निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग करने पर शाजापुर में कोर्ट ने सुनाया फैसला

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शाजापुर.तृतीय सदस्य मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण शाजापुर के न्यायाधीश दीपककुमार पांडेय की कोर्ट ने दुर्घटना के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में फैसला देते हुए वाहन मालिक को दोषी पाते हुए मुआवजा राशि देने के आदेश दिए है। खास बात यह है कि दुर्घटना के इस प्रकरण में वाहन मालिक जिला अभिभाषक संघ शाजापुर के पूर्व अध्यक्ष है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन प्रायवेट था, लेकिन उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। ऐसे में बीमा पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन पर वाहन मालिक को मुआवजा भरना होगा।

नेशनल इंश्योरेंस बीमा कंपनी के अधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रहलादसिंह पिता देवीसिंह धौसरिया ने अपने निजी बोलेरो वाहन (एमपी 42 बीसी 0१61) का व्यासायिक उपयोग करते हुए इससे सवारियों को नर्मदा स्नान कराने के लिए भेजा था। इस वाहन में सरदारसिंह पिता अमरसिंह, संतोष बाई पति अमरसिंह, उदयसिंह राजपूत, धापूबाई पति उदयसिंह, अंतरबाई, नर्मदाबाई उर्फ नरबति बाई पति जसमत राजपूत, कमल पिता गंगाराम, नगीना पति कमल, लक्ष्मीनारायाण पिता नाथुराम, सीमाबाई पति बाबूलाल, भगवानसिंह पिता शेरसिंह राजपूत, नंदनी पिता कमल, अभिषेक पिता अंतरसिंह राजपूत सभी निवासी ग्राम निछमा को लेकर वाहन मालिक धौसरिया ने वाहन चालक अमृतलाल के साथ नर्मदा स्नान के लिए आंवलीघाट रवाना किया था। 28 मार्च 2014 को जब उक्त वाहन ग्राम इच्छावर के पास नादान रोड की ओर पहुंचा तो वाहन चालक अमृतलाल ने तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए वाहन से नियंत्रण खो दिया। इससे वाहन पलटी खा गया। इस हादसे में वाहन चालक अमृतलाल और इसमें सवार सभी यात्रियों को चोट आई। उपचार के दौरान वाहन चालक अमृतलाल और इसमें सवार नर्मदाबाई उर्फ नरबती बाई की मृत्य हो गई। इस मामले में क्षतिपूर्ति के लिए कुल 6 प्रकरण एडीजे कोर्ट में प्रस्तुत हुए। इस प्रकरण में बीमा कंपनी के अभिभाषक शर्मा के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश पांडेय ने सभी प्रकरण में कुल 6 लाख 6 हजार 681 रुपए की मुआवजा राशि वाहन मालिक धौसरिया को देने के लिए आदेश जारी किए है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि उक्त वाहन निजी था जिसका उपयोग व्यावसायिक रूप से किया जा रहा था। जो कि बीमा कंपनी की शर्तों का उल्लंघन है। साथ ही वाहन चालक के पास वैध एवं प्रभावी ड्रायविंग लायसेंस भी नहीं था। इसके परिणामस्वरुप बीमा कंपनी उक्त क्लेम प्रकरण में आवेदकों को हुई क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। कोर्ट में पीडि़त पक्ष की ओर से पैरवी अभिभाषक प्रदीप दीखित, नरेंद्र तिवारी और बन्ने शाह ने की। 

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Shahzad Khan

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