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डाॅ. सागरमल जैन ने अनेक पुस्तकों की रचना कर धर्म दर्शन के जन सापेक्ष मूल्यों को उजागर किया,-प्राच्य विद्यापीठ में गिरिश दवे की स्मृति में काव्यपाठ आयोजित

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शाजापुर। जैन तथा बौद्ध दर्शन के विभिन्न पक्षों की खोज क्षेत्र में डा़ॅ. सागरमल जैन ने महत्वपूर्ण कार्य करते हुए जिले को देश विदेश में गौरवान्वित किया है। उनकी योग्यता को सम्मानित करते हुए अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा अध्यापन के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है। आपने कई पुस्तकों की रचना करते हुए धर्म दर्शन के अनेक जन सापेक्ष मूल्यों को  को उजागर किया हैं। आपके निर्देशन में अनेक साध्वियां शौध कार्य कर चुकी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान भी भोपाल के हमीदिया कालेज में डाॅ. जैन से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
यह बात डाॅ. राजेंद्र जैन ने मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ की जिला इकाई के तत्वावधान में स्थानीय दुपाड़ा मार्ग स्थित प्राच्य विद्यापीठ में डाॅ. सागरमल जैन जन्मोत्सव, डाॅ, दुर्गाप्रसाद झाला की पुस्तक का विमोचन तथा गिरीश दवे स्मृति काव्यपाठ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि शाजापुर जिले को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा कवि पं. बालकृष्ण शर्मा ’नवीन’, प्रभागचंद शर्मा, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि श्री नरेश मेहता, तारसप्तक के महत्वपूण कवि हरिनारायण व्यास, डाॅ सागरमल जैन, तथा शिखर सम्मान प्राप्त कवि एवं पत्रकार विष्णु नागर की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। नई पीढ़ी को चाहिए कि इन रचनाकारों द्वारा रचे साहित्य से प्रेरणा ग्रहण करें। डाॅ. जैन ने डाॅ. सागरमल जैन द्वारा स्थापित प्राच्य विद्यापीठ के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि आलोचक तथा कवि डाॅ. दुर्गाप्रसाद झाला ने कहा कि डाॅ. सागरमल जैन द्वारा रचित पुस्तकों के विविध विषय हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं। उन्होंने इस अवसर पर डाॅ. जैन पर लिखी रचना का भी पाठ किया। विशेष अतिथि पूर्व विधायक पुरूषोत्तम चंद्रवंशी ने कहा कि वर्तमान समय में जीवन अत्यंत संघर्षशील हो चुका है और जीवन जीने के लिए अनेक प्रकार की जोखिम उठाना पड़ती है इसके बावजूद हम सभी के मित्र गिरीश दवे हंसते हंसाते हुए जीवन की मुश्किलों का सामना करने की सीख दे गए हैं। उनके उन्मुक्त ठहाकों को आज भी लोग याद रखते हैं। डाॅ. सागरमल जैन ने अनेक पुस्तकों की रचना कर जीवन को सार्थक करने से सम्बंधित प्रश्नों के उत्तरों की तलाश की है। विशेष अतिथि स्थानीय केंद्रीय विद्यालय के व्याख्याता शशिभूषण ने कहा कि डाॅ. झाला ने अनेक पुस्तकों की रचना की है, लेकिन उनकी पुस्तक ‘प्रश्नों की सलीब पर’ में नचिकेता आख्यान को उसकी पुराण प्राचीनता के आवरण से मुक्त कर सामयिक जीवन मूल्यों से जोड़कर जिस प्रगतिशील चेतना का परिचय दिया है, वह अत्यंत सराहनीय है। इस अवसर पर शशिभूषण ने डाॅ. झाला की चुनिंदा कविताओं का प्रभावी पाठ भी किया। विशेष अतिथि पत्रकार शिवपालसिंह ने ’मां’ शीर्षक कविता प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा बटौरी। उन्होंने सिध्द कर दिया कि वह पत्रकार होने के साथ ही कवि भी हंै। नागदा से पधारे प्रगतिशील कवि एवं गिरीश दवे के भाई दिनेश दवे ने कहा कि गिरीशजी अत्यंत संवेदनशील व्यक्ति थे। बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का हंसते हुए सामना करना उनकी विशेषता थी। वह अपने मित्रों के परम हितेषी रहे और सदैव उनकी सहायता करते रहे। जीवन को हंसते हुए व्यतीत करना ही उनका जीवन दर्शन था। इस अवसर पर श्री दिनेश ने अपनी चुनिंदा रचनाओं का पाठ भी किया। जिनमें समाज की अनेक विसंगतियों एवं विद्रुपताओं को शिद्दत के साथ उजागर किया गया। इस अवसर पर डा. झाला की पुस्तक ’समय और समय’ का विमोचन भी किया गया एवं ग्राम गिरवर पतौली के पर्यावरण प्रेमी कृषक भंवरसिंह राणा को अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन मनोज नारेलिया ने किया। अध्यक्षीय सम्बोधन में समाजसेवी माणकचंद नारेलिया ने कहा कि नगर में इस प्रकार की साहित्यिक गतिविधियां लगातार जारी रहना चाहिए। इसके अलावा नई पीढ़ी को यह भी बताया जाए कि शाजापुर जिले में किन महत्वपूर्ण रचनाकारों ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि डाॅ. सागमल जैन मोक्ष मार्ग को कर्मवाद की ओर ले जाने वाले महत्वपूर्ण रचनाकार है और उनकी रचनाओं का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। रचना पाठ के कार्यक्रम में उभरती हुई प्रतिभा मंजू वाजपेयी ने स्व. गिरीश दवे काव्यात्मक श्रध्दांजलि अर्पित की तथा कवि नागेंद्र गुर्जर, मनीष रावल, योगेश उपाध्याय कैलाश गौड़, अरूण व्यास ने सामयिक विषयों पर रचना पाठ किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पेंशनर संघ के सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन चित्रकार एवं पुरातत्व कर्मी डाॅ. जगदीश भावसार ने किया तथा आभार प्रलेसं जिलाध्यक्ष नरेंद्र गौड़ ने माना।

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Shahzad Khan

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