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जनकल्याण के लिए हुआ था जैनाचार्य आनंद ऋषिजी का जन्म-कीर्ति सुधाजी

राष्ट्रसंत की 117वीं जयंती पर हुआ गुणानुवाद सभा का आयोजन
शाजापुर (नि.प्र.)। पूर्वकाल में जब तप, संयम, साधना अधिक थी, तो उसके फल भी तत्काल मिलते थे और धरती पर तीर्थंकर भगवंतों का अवतरण होता था। लेकिन कलयुग में जब चारों तरफ हिंसा, अशांति और भय का वातावरण निर्मित होने लगा, तब जनकल्याण और मानवता को सही दिशा देने के लिए महान आत्माओं ने जन्म लेना आरंभ कर दिया। जियो और जीने दो के विश्व कल्याणकारी सिद्धांत को जनजन तक फैलाने के लिए ऐसी ही महान विभूति के रूप में राष्ट्रसंत जैनाचार्य आनंद ऋषि जी महाराज साहब का जन्म 117 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में हुआ। आचार्यश्री ने जीवन पर्यंत विश्व शांति हेतु आदर्श स्थापित किए। 
उक्त आशीर्वचन पपू महासती वल्लभकुंवरजी मसा की आज्ञानुवर्ति सुशिष्या श्रमणसंघीय महासती कीर्ति सुधाजी मसा ने सोमवार को स्थानीय कसेरा बाजार स्थित स्थानक में राष्ट्रसंत आचार्य आनंद ऋषि मसा के जन्म दिवस पर आयोजित गुणानुवाद धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों के समक्ष व्यक्त किए। इस अवसर पर नूतनप्रभा श्रीजी, आराधना श्रीजी, भक्ति श्रीजी तथा आस्था श्रीजी का भी समाज के लोगों को पावन सानिध्य मिला। कीर्तिसुधाजी मसा ने कहा कि संयम जीवन में आराधना के स्तंभ आचार्य आनंद ऋषि मसा सर्वधर्म सम्मेलन के प्रणेता रहे और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्र संत की उपाधि उन्हें प्रदान की। 1962-63 में आचार्य पदवी ग्रहण करने के बाद मसा ने प्रथम वर्षावास शाजापुर में ही किया था और इसके बाद सन 1972 में मेरी दीक्षा के अवसर पर शाजापुर पधारे थे। 13 वर्ष की उम्र में सांसारिक जीवन को त्यागने वाले श्रमणसंघ एवं स्थानकवासी परंपरा के अग्रदूत आचार्यश्री का 28 मार्च 1992 को अहमद नगर महाराष्ट्र में निर्वाण हुआ और वर्तमान में आपकी समाधी आनंदधाम महाराष्ट्र में स्थित है। प्रवचन के मुख्य रूप से दौरान आनंद बहु मंडल व वल्लभ बहुमंडल की सरला जैन, सीमा जैन, निशी जैन, रानू जैन, ममता कोठारी, अंकिता जैन, पुष्पा जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। गुणानुवाद सभा का संचालन अजीत जैन ने किया।

जनकल्याण के लिए हुआ था जैनाचार्य आनंद ऋषिजी का जन्म-कीर्ति सुधाजी Reviewed by Anonymous on 7/25/2017 Rating: 5

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