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शबे बारात जो अल्लाहताला से जो मांगोगे मिलेगा- हाजी मोहम्मद हनीफ खान- शबे बरात पर विशेष


शहजाद खान,शाजापुर/ मक्सी- शबे बारात क्या है? :इस्लाम के दिए हुए अक़ीदे तोहीद की रूह से 5 रातों को साल भर की तमाम रातों पर फोकियत व् बरतारी  हासिल है, 1- शबे मेराज, 2-सभी बारात 3-शबे कद्र और इदेन की दो रातें, क़ुरआने करीम ने शबे बरात को लयलतुल मुबारेका कहां है और हमारी इस तलाह में ये मुबारक रात शब-ए-बारात के नाम से मशहूर है, बारात के मायने अरबी जुबान में रिहा होने और छुटकारा या निजात पाने के आते हैं, और इसलिए ये रात ऐसी है कि जिसमें अल्लाहताला की तरफ से बड़ी तादाद में इंसानों के गुनाह और उनकी खताएं माफ़ करके अजाबे जहन्नुम से बरी करा दिया जाता हे, इसलिए इस रात का नाम भी लयलतुल बरात और शब-ए-बरात करार रहा है, ये  मुबारकरात शबआन की 15वीं रात है, जो 14 तारीख की शाम से शुरू होती है, और सुबह सादिक तक रहती है, इसी रात में हुजूरे पाक रोज मररा से ज्यादा इबादत फरमाते थे, मुर्दों की दुआएं मगफिरत के लिए रात के पिछले हिस्से में शहरे खामशा (कब्रिस्तान) तसरीफ ले जाते थे, और दूसरे दिन रोजा रखते थे, अब यही हमारे लिए शब-ए-बारात मनाने का सुन्नत तरीका है, इस रात शबेदारी करें, ज्यादा से ज्यादा इबादत करके अपने गुनाहों की मगफिरत अल्लाह से चाहे और रोजा रखें
 फजाईले शब-ए-बारात –
 शब-ए-बारात की खासियत है कि इस रात को मगरिब के बाद से ही अल्लाहताला की तज्लियत और अनवार ए इलाही का दुनिया पर खास नुजूल होता है, अल्लाह फरमाता है कि कोई इस्तेफाल करने वाला है कि मैं उसके गुनाहों को माफ कर दू, हे कोई रिजक मांगने वाला कि मैं उसे रिजक अता कर दू,  हे कोई आफत या मुसीबत जदा कि में उसे बलाओं से निजात दू, गरज तमाम रात इसी तरीके से अल्लाह की रहमत और उसके करम की बारिश होती रहती है सुबह सादिक तक,  इस मुबारक रात के तिहाई हिस्से तक अल्लाह की नियामत तक्सीम ही नहीं होती बल्कि लूटाई जाती है, अब हम पर मोकुफ हे कि हम कितना सवाब हासिल कर सकते हैं,
मोत और हयात के फैसले की रात-
 इस रात में तमाम दुनयावी उमूर का फैसला कुदरत की तरफ से होता है, मसलन खेतों में कितना अनाज पैदा होगा, जंग होगी यह अमन कायम होगा, फतह होगी या हार होगी, कितना पानी बरसेगा, और कुदरत की तरफ से यह फैसले भी इस रात में आते हैं, कि आने वाले साल में कितने लोगों को दुनिया में भेजना है, और कितने लोगों को दुनिया से वापस बुलाना हे, यह तमाम फैसले अल्लाह की तरफ से इसी रात को होते हैं,
दुआ कुबूल होने की रात-
इस रात अल्लाहताला गुरुबे आफताब के वक्त से ही आसमाने दुनिया पर जलवा फरमाह होते हैं, और इरशाद ए खुदा बंदी होता है, कि हे कोई दुआएं मांगने वाला, मगफिरत चाहने वाला, कि मैं उसकी दुआएं कुबूल, करू, अत: इस मुबारक रात में हम अल्लाहताला के सामने सर निगूं होकर इजरो इन्किसारी न्याज्मंदी व् बेचारगी के साथ उसके सामने झुक जाएं, गिड़गिड़ाकर और अपनी कमतरी के इजहार के साथ दुआ मांगे, अल्लाहताला आपकी दुआओं को जरुर कुबूल करेगा
प्रस्तुति हाजी मोहम्मद हनीफ खान मक्सी

शबे बारात जो अल्लाहताला से जो मांगोगे मिलेगा- हाजी मोहम्मद हनीफ खान- शबे बरात पर विशेष Reviewed by MALWA ABHITAK MP on 5/01/2018 Rating: 5

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