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आरक्षण 10 वर्ष के लिये लागू हुआ था, प्रति 10 वर्ष में पुनरीक्षण होना था, परन्तु 70 वर्षों में उस पर विचार नही हुआ- हीरालाल त्रिवेदी 

जबलपुर -देश में जब पहली बार भारतीय संविधान लागू हुआ था, तो उसमें आरक्षण का स्वरूप तत्कालीन आवश्यकता को देखते हुए 10 वर्ष के लिये लागू हुआ था, प्रति 10 वर्ष में पुनरीक्षण होना था, परन्तु 70 वर्षों में उस पर विचार नही हुआ। आज वह विकृत हो चुका है, इसलिए उसमें परिवर्तन ही एकमात्र उपाय है. परन्तु वोट बैंक के चक्कर में सरकारो ने उसे और विकृत कर कानून बनाने के अधिकार का दुरुपयोग किया है, जिसका नतीजा आरक्षण आज देश में जाति एवम वर्ग संघर्ष का बड़ा कारण बन चुका है. सरकारें इतने पर भी नहीं रुक रही है. वरन हर क्षेत्र में जाति गत आरक्षण लादकर जनमानस को विभाजित करने में लगी हुई है.
उक्त बात सपाक्स समाज के मुख्य संरक्षक पूर्व आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी ने जबलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय सम्मेलन में संबोधित करते हुए कही.

त्रिवेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण के नियमों को अवैध करने के दिए गए निर्णय के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने वाली प्रदेश सरकार अब तक 4 करोड़ रुपए इस मुद्दे पर खर्च कर चुकी है और पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लडऩे के लिए सरकार ने 7 करोड़ का बजट बनाया है, जबकि फंड के अभाव में अनारक्षित वर्ग के 89 हजार पद रिक्त पड़े हुए हैं. त्रिवेदी ने कहा कि देश को उम्मीद थी कि 20वीं सदी के बाद 21वीं सदी जाति और साम्प्रदायिक दंश  से मुक्त होगी, लेकिन सरकार ने नई सदी को आरक्षण की सदी का बना दिया है. जबकि गरीब और पिछड़े के विकास के लिए जातिगत नहीं आर्थिक आधार पर आरक्षण की आवश्यकता है, लेकिन सरकार ने साल 2011 की जनगणना को ही जाति आधार पर कराया और आज नौकरी और शिक्षा ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में जाति आधारित निर्णय हो रहे है। कृषि प्रधान देश में किसानो की योजनाओं और कार्यक्रमों तक में जातिवाद लागू कर दिया है. सोयाबीन बीज का वितरण तक जाती के आधार पर किया गया। सपाक्स के गरीब किसानों को कम बीज दिया गया। क्या उनके खेतो में कम बीज की बुआई होती है। सपाक्स सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग को जागृत करना है. साथ ही राजनीतिक शुद्धिकरण के लिए जनजागृति लाना  तथा अच्छे उम्मीदवारों के चयन में सक्रिय भूमिका निभाना है.
जबलपुर में आयोजित संभागीय सम्मेलन में सपाक्स संगठन संरक्षक  पूर्व संचालक स्वास्थ्य विभाग डॉ. केएल साहू अध्यक्ष सपाक्स समाज, सपाक्स के प्रदेश संयोजक ई. पी एस परिहार  ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आलोक पांडे, राष्ट्र व्यापारी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव, सवर्ण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव, मानवता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मानवती तिवारी, ब्रह्म समाज सवर्ग जनकल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा कक्काजी राष्ट्रीय आरक्षण पीडि़त वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक पं. अमित आदि ने भी विचार व्यक्त किये।

*भाजपा के पूर्व प्रवक्ता सपाक्स के मंच पर आए*
भाजपा की आरक्षण विरोधी नीति के विरोध में भाजपा के पूर्व प्रवक्ता दीपक पचौरी जिन्होंने पूर्व मे भाजपा की आरक्षण नीति से क्षुब्ध होकर  पद एवं कार्यकारिणी से त्याग पत्र दिया था, सपाक्स समाज के मंच पर आए. इस अवसर पर सपाक्स समाज ने दीपक पचौरी एवं अमित खम्परिया का स्वागत किया.
कार्यक्रम का संचालन सपाक्स के प्रदेश संयोजक ई. पी एस परिहार ने किया।
आरक्षण 10 वर्ष के लिये लागू हुआ था, प्रति 10 वर्ष में पुनरीक्षण होना था, परन्तु 70 वर्षों में उस पर विचार नही हुआ- हीरालाल त्रिवेदी  Reviewed by MALWA ABHITAK MP on 7/01/2018 Rating: 5

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